मड़वढ़ अथवा मड़वर राठौड़ ( महरौड़ / महरौढ़ ) क्षत्रिय राजपूत वंश, सूर्यवंश की एक प्रमुख राठौड़ शाखा है । ▎वंश की जानकारी - गोत्र : वत्स - प्रवर : पाँच~जामदग्न्य, अप्तुवान, च्यवन, भार्गव व और्व - वेद : सामवेद - शाखा : कौथुमी - सूत्र : गोभिल गृह्यसूत्र - पक्षी : श्येन (बाज) - वृक्ष : नीम - गऊ : कपिला - ईष्ट : शिव तथा - विरूद : रणबंका व कामध्वज है। ▎कुलदेवी - कुलदेवी : नागणेचियां माता ( मां छेरावरी / बन्नी माता ) हैं। ▎उत्पत्ति - महरौढ़ वंश की उत्पत्ति सूर्यवंश से हुई है। सूर्यवंश की शाखा राठौड़ वंश तथा राठौड़ वंश की शाखा महरौढ़ वंश है। इस वंश का एक गौरवशाली इतिहास रहा है। ये स्वाभाविक रूप से अत्यन्त स्वाभिमानी, धार्मिक, एवं अपनी वीरता व युद्ध कौशल के लिए इतिहास प्रसिद्ध हैं। ▎ऐतिहासिक पृष्ठभूमि - इतिहास, साहित्य व जनश्रुतियों पर गौर करें तो, सन् 1527, महाराणा संग्राम सिंह (राणा सांगा) और बाबर के बीच खानवा का युद्ध हुआ। - बाबर ( मूल रूप से फरगना का निवासी था, उज़्बेग आक्रमण से अपना जान बाचकर भारत की तरफ भागा ) इस युद्ध को अपने अस्तित्व बचाने के लिए लड़ रहा था।...